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पदभार संभालते ही सख्त हुए नए राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल, विभाग में बड़े बदलाव के संकेत

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बिहार के नए राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने पदभार संभालते ही विभाग में सुधार, भ्रष्टाचार पर सख्ती और लंबित कार्यों के निपटारे का भरोसा दिया है। आम जनता को राहत देने की बात कही गई।

पटना/आलम की खबर:बिहार में कैबिनेट विस्तार के बाद जैसे ही विभागों का बंटवारा पूरा हुआ, वैसे ही नए मंत्रियों ने अपने-अपने विभागों में कामकाज संभालना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में भाजपा नेता एवं वरिष्ठ विधायक दिलीप जायसवाल ने शुक्रवार को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। पदभार संभालते ही उनके तेवर काफी सख्त नजर आए और उन्होंने साफ संकेत दे दिया कि विभाग की कार्यशैली, पारदर्शिता और जवाबदेही में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं।
मंत्री बनने के बाद मीडिया से बातचीत में दिलीप जायसवाल ने कहा कि यह विभाग उनके लिए नया नहीं है, क्योंकि वे पहले भी इस विभाग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि उस दौरान विभाग में बड़े पैमाने पर सुधारात्मक कदम उठाए गए थे और करीब 11 हजार कर्मियों की बहाली की गई थी। इसके साथ ही लंबे समय से अटके कैथेड्रल सर्वे और रिविजनल सर्वे को भी आगे बढ़ाने का काम हुआ था, जो बिहार में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया मानी जाती है।
भूमि सर्वे को लेकर पुराने अनुभव और चुनौतियां
मंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब सर्वे प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब राज्य के कई हिस्सों में लोगों के बीच भ्रम और चिंता का माहौल बन गया था। आम जनता को यह डर था कि यदि वे सर्वे में सही ढंग से हिस्सा नहीं ले पाए तो उनकी जमीन और संपत्ति प्रभावित हो सकती है। लेकिन बाद में विभागीय टीमों ने लगातार मेहनत कर स्थिति को संभाला और प्रक्रिया को सुचारू बनाया।
उन्होंने कहा कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग हमेशा से एक अत्यंत संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण विभाग रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम जनता की जमीन, संपत्ति और अधिकारों से जुड़ा होता है। इसी कारण यह विभाग अक्सर विवादों और शिकायतों के केंद्र में भी रहता है।
“कालकोठरी” जैसी छवि पर चिंता
नए मंत्री ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि एक समय ऐसा भी आया था जब इस विभाग को लेकर लोगों में नकारात्मक धारणा बन गई थी। यहां तक कि कई लोग इसे “कालकोठरी” जैसा विभाग कहने लगे थे, क्योंकि आम जनता को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए भी बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति किसी भी सिविल सेवा व्यवस्था के लिए सही नहीं है और इसे बदलना उनकी प्राथमिकता होगी। उनका स्पष्ट संदेश है कि अब विभाग को जनता के लिए सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना होगा।
लंबित कार्यों और हड़ताल का असर
मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि हाल के दिनों में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कामकाज काफी प्रभावित हुआ। पिछले लगभग तीन महीनों से दाखिल-खारिज, जमीन रसीद, नामांतरण और भूमि विवाद से जुड़े कई मामले लंबित पड़े रहे, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि इस स्थिति को अब तेजी से सुधारा जा रहा है और सभी सेवाओं को फिर से सामान्य करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी नागरिक को अपने काम के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति
दिलीप जायसवाल ने विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नीचे स्तर पर फैली अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें किसी से छिपी नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को गलत कार्य करने की छूट नहीं दी जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि पहले भी उन्होंने इस विभाग में कार्यकाल के दौरान कार्रवाई की थी, तो इस बार भी कोई ढील नहीं दी जाएगी। उनका उद्देश्य केवल व्यवस्था को सुधारना और जनता को राहत देना है।
पारदर्शिता और डिजिटल सुधार पर जोर
मंत्री ने संकेत दिए कि आने वाले समय में विभाग में तकनीकी और डिजिटल सुधारों को भी बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि लोगों को ऑनलाइन सेवाओं के माध्यम से तेजी से लाभ मिल सके। जमीन से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनता के कामों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जनता के लिए क्या बदलेगा?
नए मंत्री के इन बयानों के बाद उम्मीद की जा रही है कि राजस्व विभाग में कई बड़े प्रशासनिक और संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खासकर जमीन विवाद, दाखिल-खारिज और रिकॉर्ड सुधार से जुड़े मामलों में तेजी आने की संभावना है।
सरकार की कोशिश है कि आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें और सभी सेवाएं समय पर उपलब्ध हों।
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बताते चलें कि,बिहार का राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग हमेशा से जनता और प्रशासन दोनों के लिए एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहा है। नए मंत्री दिलीप जायसवाल के सख्त रुख से यह उम्मीद जगी है कि विभाग की कार्यप्रणाली में वास्तविक सुधार देखने को मिलेगा।
हालांकि, केवल सख्त बयान काफी नहीं होते, असली बदलाव जमीन पर काम करने से आता है। अगर भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, लंबित मामलों का तेजी से निपटारा और डिजिटल पारदर्शिता वास्तव में लागू होती है, तभी जनता का भरोसा बहाल हो पाएगा।
अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह सख्ती केवल बयान तक सीमित रहती है या फिर प्रशासनिक सुधारों का एक नया अध्याय शुरू होता है।

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